सतपाल महाराज ने पर्यावरण मंत्री को लिखा पत्र, कहा- मार्गों के निर्माण में वन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का हो समाधान

punjabkesari.in Thursday, Feb 01, 2024 - 04:42 PM (IST)

 

देहरादूनः उत्तराखंड के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को एक पत्र लिखकर राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के सुगम यातायात हेतु वांछित मोटर मार्गो के निर्माण में वन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बाधित रहने से हो रही समस्याओं के निदान का अनुरोध किया है ताकि प्रदेश में सड़कों के निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके।

सतपाल ने यादव को पत्र में लिखा है कि राज्य में लगभग 80 प्रतिशत भू-भाग पहाड़ी एवं 20 प्रतिशत मैदानी क्षेत्र है। इसमें से 70 प्रतिशत भू-भाग वन आच्छादित है, जिस कारण, पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के सुगम यातायात हेतु वंछित मोटर मार्गो के निर्माण में अधिकांशत: वन भूमि की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि अधिकांश मार्गों में एक हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि की आवश्यकता के कारण क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण (सीए लैंड) हेतु दोगुनी भूमि की आवश्यकता का प्रावधान है। वन भूमि के अलावा, उपलब्ध राजस्व भूमि इस कार्य हेतु उपलब्ध करवाई जाती है, किंतु वन विभाग द्वारा इसे क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण हेतु उपयुक्त नहीं पाया जाता है, जिसका मुख्य कारण उपलब्ध भूमि का पहाड़ की भौगोलिक परिस्थिति में तीक्ष्ण ढाल, पथरीली भूमि एवं सघन वन क्षेत्र होना होता है, जिस कारण वन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बाधित रहती है।

केंद्रीय वन मंत्री को लिखे अपने पत्र के माध्यम से सतपाल ने सुझाव दिया है कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु दोगुनी भूमि के स्थान पर केंद्र की योजनाओं की भांति एक गुना भूमि का ही प्राविधान रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र की योजनाओं की भांति वन विभाग के स्वामित्व की डिग्रेडेट वन भूमि को क्षतिपूरक वृक्षारोपण के उपयोग में मान्य किया जा सकता है। उन्होंने पत्र में यह भी अनुरोध किया कि उपयुक्त भूमि के राज्य में उपलब्धता की कमी के दृष्टिगत अन्य राज्यों में उपलब्ध लैंड बैंक को क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु प्रयोग किए जने के साथ-साथ राज्य हित में उनके सुझावों पर दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।


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Nitika

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