नैनीताल-काठगोदाम रोपवे से जुड़ेगा कैंची धाम, ज्योलीकोट बनेगा जंक्शन स्टेशन, बैठक में लिया गया अहम फैसला
punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 10:40 AM (IST)
हल्द्वानी: उत्तराखंड के काठगोदाम-नैनीताल रोपवे परियोजना को अब कैंची धाम से भी जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए ज्योलीकोट में जंक्शन बनाया जाएगा। बुधवार को काठगोदाम स्थित सकिर्ट हाउस में प्रमुख सचिव ऊर्जा, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में तय किया गया कि काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन ने बैठक में परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। कहा कि काठगोदाम-नैनीताल रोपवे की अनुमानित लागत करीब 2800 करोड़ रुपए होगी। परियोजना में काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी स्टेशन प्रस्तावित हैं। रोपवे की कुल लंबाई 14.9 किलोमीटर होगी और इसमें 58 टावर बनाए जाएंगे। प्रस्ताव के मुताबिक, रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक एकतरफा किराया 375 रुपए प्रति व्यक्ति होगा। रोपवे की क्षमता करीब 1800 यात्री प्रति घंटे होगी और रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक की यात्रा लगभग 20 से 25 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
ज्योलीकोट स्टेशन को जंक्शन स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां से कैंची धाम के लिए रोपवे कनेक्टिविटी प्रस्तावित की गई है। इस परियोजना के तहत काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक करीब 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज बनाने की योजना भी है। इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को रोपवे स्टेशन तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना है। काठगोदाम और आसपास पार्किंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी, ताकि बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक अपने वाहन पार्क कर रोपवे से आगे की यात्रा कर सकें। प्रमुख सचिव ने रानीबाग में प्रस्तावित रोपवे स्टेशन का स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि वहां करीब 33 एकड़ भूमि खाली है, जिसका उपयोग स्टेशन और पार्किंग जैसी सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है। उन्होंने हनुमानगढ़ी स्टेशन पर यातायात का अत्यधिक दबाव न बढ़े, इसके लिए पहले से समुचित यातायात प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव ने वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने और एनएचएलएमएल सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया गया कि हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है, इसलिए तकनीकी अध्ययन पूरा होने के बाद ही निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जाए। बैठक में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, एनएचएलएमएल के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन, उपजिलाधिकारी मोनिका सहित लोक निर्माण, विद्युत, वन, सिंचाई और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
