Uttarakhand News : 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान ! जानिए क्या है पूरा मामला
punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 10:50 AM (IST)
देहरादूनः 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद रहेगा। इसके लिए उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने एलान किया है। भाजपा को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। कहा कि मामले में वीआईपी को जांच के दायरे में लाया जाए । साथ ही आरोपियों के नाम भी सार्वजनिक करें। इसके अलावा सरकार से जल्द सीबीआई जांच की संस्तुति करने की मांग की गई है।
आपको बता दें कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड में किसी 'वीआईपी' के नहीं होने का स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद विपक्षी दलों ने प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की अपनी मांग को लेकर रविवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद), महिला मंच, वामपंथी दलों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता यहां परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करते हुए हत्याकांड में 'वीआईपी' के नाम का खुलासा किए जाने के लिए प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की अपनी मांग को दोहराया। वहीं, 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान हाथों में 'अंकिता को न्याय दो', 'और नहीं अब देर करो, मुख्यमंत्री को घेर लो' और 'असली दोषी कौन है, जो दिल्ली में मौन है' की तख्तियां लिए विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और कहा कि मांग न माने जाने तक यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस विरोध मार्च में शामिल होने के लिए लोगों से अपील करने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि हत्याकांड की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी शेखर सुयाल द्वारा मामले में किसी 'वीआईपी' की संलिप्तता न होने संबंधी बयान से सहमत नहीं हुआ जा सकता।
मैखुरी ने कहा कि कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा पिछले साल मई में सुनाए गए फैसले में हत्याकांड के लिए पौड़ी जिले के वनंत्रा रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य तथा उसके दोनों कर्मचारियों-अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। तथा कहा गया था कि अपराध का मकसद 'वीआईपी' को 'विशेष सर्विस' न देना था। उन्होंने कहा कि अब अगर पुलिस अधिकारी सुयाल, वीआईपी होने की बात को नकार रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप अपराध का मकसद ही खत्म कर दे रहे हैं।
कहा कि इस मामले में जिनका नाम आ रहा है, उन्हें तो आप पकड़ नहीं रहे हैं, बल्कि जिन्हें सजा मिल चुकी है, उनके छूटने का भी रास्ता खोल रहे हैं।'' मैखुरी ने कहा कि उनकी मांग है कि मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई द्वारा की जाए ताकि वीआईपी का पता चल सके।
