उत्तराखंड में क्या दलबदलेगा खेल?, कांग्रेस BJP के सामने जानिए क्या हैं चुनौतियां
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 02:59 PM (IST)
उत्तराखंड: उत्तर प्रदेश के सहित उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। ऐसे में राजनीतिक दल अपने जातीय एंव क्षेत्रीय समीकरण के साथ नए और पुराने चेहरे के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटी हैं। कांग्रेस जहां सत्ता में वापसी के लिए दम लगाएगी तो भाजपा 2027 के चुनाव में हैट्रिक लगाने की चाहत में हैं ऐसे में बड़ा सवाल है कि जनता किसे फिर उत्तराखंड की सत्ता देगी?
स्थानीय प्रभाव वाले नेताओं पर कांग्रेस का फोकस
राजनीतिक पंडितों की मानें तो भाजपा के पूर्व विधायकों और स्थानीय प्रभाव वाले नेताओं ने भी कांग्रेस का रुख किया है। ऐसे में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रहने वाला, बल्कि पहाड़ बनाम तराई और पुराने संगठन बनाम नए चेहरों का समीकरण भी चुनावी नतीजों पर असर डाल सकता है। दोनों पार्टियां अभी से संगठन और संभावित उम्मीदवारों को लेकर अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं। अगर बता करें पहाड़ी विधानसभा सीटों पर तो उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, गांव-गांव का संपर्क और स्थानीय संगठन चुनाव में काफी मायने रखता है। ऐसे में कांग्रेस के लिए सिर्फ नया प्रत्याशी घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा, उसे उसके पीछे पूरा संगठन भी खड़ा करना पड़ेगा तो नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।
BJP ने 47 सीटें जीतकर बनाई थी सरकार
उत्तराखंड में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं जिसमें से सामान्य सीटें 55 हैं जब कि अनुसूचित जाति (SC): 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। अनुसूचित जनजाति (ST): 2 सीटें अनुसूचित के लिए सुरक्षित हैं। 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में BJP ने 70 में से 47 सीटें बीजेपी जीती थीं। यानी बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला था।
BJP: 47 सीटें
कांग्रेस: 19 सीटें
BSP: 2 सीटें
निर्दलीय: 2 सीटें
कांग्रेस को करीब 20 सीटों पर करना होगा अधिक फोकस
अगर कांग्रेस को सत्ता में वासपी करना है तो करीब 20 सीटों पर अधिक फोकस करना होगा ताकि बहुमत का आंकड़ा पा सके। कांग्रेस की चुनावी तैयारी को देखते हुए पार्टी संगठन में भी बदलाव कर रही है। वहीं भाजपा ने भी 2027 को लेकर बूथ स्तर पर अपनी तैयारी तेज की है और पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन में अनुशासन तथा एकजुटता पर जोर दिया जा रहा है। दोनों दलों की तैयारी बताती है कि चुनाव अभी दूर होने के बावजूद जमीन पर मुकाबला शुरू हो चुका है।
