उत्तराखंड लौटने की तैयारी में ऋषभ पंत...पैतृक गांव में मकान का पुनर्निर्माण शुरू, ग्रामीणों में जश्न का माहौल

punjabkesari.in Monday, Aug 10, 2026 - 06:05 PM (IST)

पिथौरागढ़: उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में भारतीय क्रिकेट स्टार ऋषभ पंत के पैतृक गांव पाली आमडाली में उनके पुराने मकान का पुनर्निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मकान तैयार होने के बाद ऋषभ पंत भी अपने बचपन से जुड़े इस गांव में नियमित रूप से आया करेंगे। 

ग्रामीणों के अनुसार, किक्रेटर की मां सरोज पंत चार अगस्त को करीब दो दशक बाद गांव पहुंचीं और पांच दिन यहां रहकर पुराने एवं जर्जर हो गए पैतृक मकान के पुनर्निर्माण के लिए ठेकेदार की तलाश की। उन्होंने बताया कि मकान का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया गया है। ऋषभ पंत के चाचा और पाली गांव निवासी मदन मोहन पंत ने बताया, "ऋषभ की मां ने पुराने मकान का पुनर्निर्माण शुरू कराया है। मकान तैयार होने के बाद उम्मीद है कि ऋषभ भी गांव में ज्यादा समय बिता सकेंगे।" ग्रामीणों के मुताबिक, पंत के दादा करीब 60 वर्ष पहले रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर रुड़की में बस गए थे। करीब 20 वर्ष पहले वह उन्हें लेकर गांव आए थे। उस समय ऋषभ पंत की उम्र लगभग सात वर्ष थी और बचपन में कुछ समय उन्होंने गांव में बिताया था। 

दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट करेंगे अपना बेस
ऋषभ पंत के पैतृक मकान के पुनर्निर्माण की खबर ऐसे समय आई है जब हाल में उन्होंने उत्तराखंड में अपनी जड़ें मजबूत करने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। उन्होंने 'एक्स' पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड में जमीन खरीदने में मदद की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वह राज्य में लौटना चाहते हैं और दिल्ली से अपना 'बेस' उत्तराखंड स्थानांतरित करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने ऋषभ पंत 'उत्तराखंड का गौरव' बताते हुए कहा था कि सरकार नियमों के तहत हरसंभव सहयोग करेगी और इस संबंध में संबंधित अधिकारी उनसे जल्द संपर्क करेंगे। 

ग्राम प्रधान बोले- 'युवाओं को मिलेगी प्रेरणा
ग्राम प्रधान विनोद कुमार ने कहा, "मकान बनने के बाद अगर ऋषभ गांव में आते-जाते हैं तो इससे स्थानीय युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और पूरे क्षेत्र में गर्व की भावना पैदा होगी।" ऋषभ पंत के एक अन्य चाचा ललित पंत ने कहा कि पैतृक मकान का पुनर्निर्माण उनकी अपनी जड़ों और पहाड़ से जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऋषभ का अपने पैतृक गांव से जुड़ना पिथौरागढ़ और पूरे पहाड़ी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संदेश है। 


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Ramanjot

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