कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री का हुआ निधन, सियासी गलियारे में शोक की लहर
punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 11:22 AM (IST)
Hira Singh Bisht Passes Away : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 85 वर्ष के थे। सूत्रों ने बताया कि शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे तबियत बिगड़ने पर बिष्ट को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बिष्ट के निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और श्रमिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें उत्तराखंड की राजनीति व श्रमिक आंदोलन का समर्पित जननेता बताया। मुख्यमंत्री और गोदियाल ने यहां डीएल रोड स्थित विष्ट के आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बिष्ट के शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की और उन्हें ढांढस बंधाया।
गोदियाल भी कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ बिष्ट के आवास पर पहुंचे और पुष्पचक्र व कांग्रेस का ध्वज समर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। गोदियाल ने भगवान से उनके शोकाकुल परिजनों और समर्थकों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। चार नवंबर 1940 को जन्में बिष्ट ने अपना राजनीतिक जीवन अविभाजित उत्तर प्रदेश से शुरू किया था। वह कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य बनने से पहले और बाद, दोनों दौर में सक्रिय भूमिका निभाई। बिष्ट तीन बार विधायक रहे। वर्ष 1985 में वह पहली बार देहरादून विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। उत्तराखंड के गठन के बाद 2002 में उन्होंने राजपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और 2014 में डोईवाला उपचुनाव जीतकर एक बार फिर विधानसभा पहुंचे।
उत्तराखंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में बिष्ट ने कैबिनेट मंत्री के रूप में परिवहन और श्रम जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। श्रमिकों और कर्मचारियों के मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ थी तथा वे हमेशा मजदूर हितों के मुखर समर्थक रहे। श्रमिक आंदोलन से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। वह उत्तराखंड के इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे और श्रमिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे।
